08 दिसंबर 2017 पलवल, हरियाणा (F)
उस नन्ही सी जान के लिए उनका इरादा बिल्कुल भी नेक नहीं था। इसलिए उसे ऊपर से ही फेंक दिया गया नीचे बहती नहर में, लेकिन वह नहर तक नहीं पहुंची और बीच झाड़ियों में ही अटक गई। पैदा हुए कुछ घंटे भी नहीं बीते होंगे उसे। ऊंचाई से फेंका गया था और फिर झाड़ियों ने लपक लिया। इतने पर भी नियति को उस पर रहम नहीं आया। लाल चींटियां उस पर टूट पड़ीं। घटना हरियाणा के पलवल शहर में 28 दिसंबर को घटी। उस बच्ची का जन्म संभवतः किसी अस्पताल में ही हुआ था। उसकी नाल काटकर कैप लगाई गई थी। फिर उसे डस्टबिन में लगाने वाले काले रंग के एक बड़े पॉलीथिन में पैक किया गया और सुबह करीब नौ से दस के बीच उस मासूम बच्ची को फेंकने वाले ने नहर की तरफ उछाल दिया था। अगर वह पानी में डूब जाती तो शायद किसी को पता भी नहीं चलता कि वह जिंदा थी। मगर पानी तक पहुंचने से पहले ही बीच झाड़ियों में वह पॉलिथीन अटक गया। ऊपर से गिरने की वजह से न जाने कितनी हड्डियां चटक गई होंगी उसकी। और उसी दर्द में वह बेहोश हो गई। इसी बीच लाल चींटियों ने उसे अपना आहार समझ नोंचना शुरू कर दिया। दर्द और पीड़ा के उन्हीं लम्हों में न जाने किस फरिश्ते को उसकी चिहुंक सुनाई दे गई और उसने वह पॉलीथिन वहां से बाहर निकाला और पलवल सीडब्लूसी को सूचित किया। सीडब्लूसी सदस्य अल्पना मित्तल जी ने बताया कि बच्ची की स्थिति बहुत खराब थी। उसे काफी चोटें आईं थीं। उसके बेहतर इलाज के लिए उसे पलवल से 80 किलोमीटर दूर एक बड़े अस्पताल ले जाया गया। दो दिन तक बच्ची को वहां रखकर उसे बचाने का हर संभव प्रयास किया गया। लेकिन चोटें इतनी गहरी थीं कि उसे बचाया नहीं जा सका। पा-लो ना सीडब्लूसी पलवल की आभारी है कि उन्होंने बच्ची को न केवल बचाने की हर मुमकिन कोशिश की, बल्कि उसकी मौत के बाद उसे श्मशानघाट ले जाकर उसकी विधिवत अंतिम क्रिया भी की। उसे यूं ही कहीं फेंक नहीं दिया। यही सही तरीका भी है। इस घटना के बाद ही अल्पना जी ने शहरवासियों से अपील की थी कि बच्चों को फेंकने की बजाय सुरक्षित स्थान पर रख दें, जिससे कम से कम उन्हें बचाया तो जा सकेगा।
