मोनिका आर्य/निशांत गौतम
19 AUGUST 2020
JAUNPUR, UP (F, A)
क्या हुआ -
बुधवार का दिन था। समय यही करीब 11 बज रहे होंगे। कुछ राहगीरों ने थाना पवारा को एक बच्ची की सूचना दी। यह बच्ची थाने से मात्र 500 मीटर की दूरी पर राय बरेली हाईवे पर सड़क किनारे कुछ झाड़ियों के पास जमीन पर थी। सूचना
मिलते ही हैड कॉंस्टेबिल मोनी मौर्या व सब इंस्पेक्टर चंद्रमा पासवान घटनास्थल पर पहुंचे। बच्ची का पैर खून से लथपथ था। उन्होंने उसे उस कपड़े में लपेटा, जो वे थाने से ही लेकर गए थे। और निकटवर्ती सतहरिया सामुदायिक स्वास्थ्य
केंद्र की तरफ दौड़ पड़े।
वहां डॉक्टर्स ने संभावना जताई कि बच्ची का जन्म उसी दिन तड़के किसी समय किसी अस्पताल में ही हुआ होगा। उन्होंने ये भी अंदेशा जताया कि बच्ची को नेवले ने काटा है। वहां फर्स्ट एड दिलाने के बाद बच्ची को चाईल्डलाईन के सुपुर्द
कर दिया गया। चाईल्डलाइन के राजकुमार पांडेय ने बच्ची को अपनी कस्टडी में लिया।
चाईल्ड लाइन बच्ची को लेकर शाम करीब पौने पांच बजे जौनपुर पहुंची। डॉक्टर ने उसे जिला अस्पताल के एसएनसीयू में एडमिट तो किया, लेकिन उसकी खराब स्थिति को देखते हुए बीएचयू रैफर कर दिया। उसी दिन रात को वे बच्ची को लेकर
बीएचयू निकल गए और रात साढ़े नौ बजे बीएचयू पहुंचे। लेकिन कोरोना के मद्देनजर वहां बच्चों के सभी वार्ड बंद होने की वजह से रात ढाई बजे उन्हें बच्ची को वापिस जौनपुर लाकर वहीं एडमिट करवाना पड़ा। इसके बाद 29 तारीख को सरोजिनी
नायडू अस्पताल इलाहाबाद में बच्ची को एडमिट करवाया गया। अभी भी बच्ची वहीं एडमिट है। वह अपने पैर की तीन उंगलियां खो चुकी है। उसका वजन शुरुआती पौने दो किलो से भी कम हो चुका है। उसकी स्थिति अभी भी क्रिटिकल बनी हुई है।
सरकारी व अन्य पक्ष -
"जब हम घटनास्थल पर पहुंचे तो बच्ची एक पानी भरे गड्ढे के साइड में रखी हुई थी। वह सिर्फ डायपर पहनी थी। उसके शरीर पर और कोई कपड़ा नहीं था, सिवाय एक छोटे से लाल कपड़े के, जो उसके नीचे जमीन पर
बिछा था। हमने उसे अपने कपड़े में लपेटा और तुरंत पास के अस्पताल में लेकर गए। बच्ची के पैर से बहुत खून बह रहा था। ऐसा लगता है कि उसे नेवले जैसे किसी जानवर ने काटा था, क्योंकि यदि कोई बड़ा जानवर जैसे कुत्ता या सियार या
कोई और खाता तो घाव दूसरी तरह के होते। इस मामले में कोई केस दर्ज नहीं किया गया है।" -
मोनी मौर्या, बच्ची को अस्पताल पहुंचाने वाली हैड कांस्टेबिल, जौनपुर
"बच्ची फिलहाल सरोजिनी नायडू अस्पताल इलाहबाद में भर्ती है। जौनपुर से टीम बारी बारी से इलाहाबाद जाकर बच्ची की देखभाल कर रही है। स्थानीय होम ने बच्ची की जिम्मेदारी नहीं ली। एक महिला कर्मी जरूर
मुहैया करवाई, जो सुबह 10 बजे से शाम पांच बजे तक अस्पताल में बच्ची के साथ रहती है। बच्ची का वजन काफी कम हो चुका है।" -
श्री अनिल कुमार, सीडब्लूसी जौनपुर
"बच्ची को पुलिस ने ही अस्पताल में भर्ती करवाया था। उसी दिन देर रात हम उसे लेकर बीएचयू चले गए थे, लेकिन वहां उसे एडमिट करवाने के हमारे प्रयास नाकाम रहे। कोरोना की वजह से वहां अभी बच्चों के
सभी वार्ड बंद है। करीब दस दिन बाद उसे इलाहाबाद में एडमिट करवाने में हम सफल रहे। जानवर के काटने की वजह से बच्ची के पैर की तीन उंगलियां खत्म हो गईं हैं।" -
श्री राजकुमार पांडे, चाईल्डलाइन, जौनपुर
पा-लो ना का पक्ष -
पा-लो ना बच्ची की स्थिति को लेकर बहुत चिंतित है। शुक्र है कि सब इंस्पेक्टर पासवान व हेड कॉन्स्टेबल मौर्या तुरन्त ही बच्ची को अस्पताल ले गए, जिससे उसकी जान बच गई।
मगर उसको हुए दर्द की कल्पना भी नहीं की जा सकती। इस घटना व इस जैसी अन्य घटनाओं को देखते हुए पा-लो ना की केंद्र व सभी राज्य सरकारों से अपील है कि -
शिशु हत्या व असुरक्षित परित्याग को रोकने के लिए सख्त कानून बनाया जाए।
असुरक्षित परित्याग को नवजात बच्चों की हत्या के प्रयास में दर्ज किया जाए और इसके लिए भी नए कानून पर विचार हो या मौजूदा कानून को सक्षम बनाया जाए।
जेजे एक्ट में व्याप्त कंफ्यूजन्स को दूर किया जाए, जो सेक्शन 38 (1) व 75 में टकराव की वजह से जन्म लेते हैं।
समाज के आम लोगों के साथ साथ सरकार के विभिन्न धड़ों को सेफ सरेंडर पॉलिसी के बारे में बताया जाए।
इसके लिए युद्ध स्तर पर एवेयरनेस प्रोग्राम चलाए जाएं।
सम्बंधित अधिकारियों व कर्मचारियों को इस अपराध के व सेफ सरेंडर के सम्बंध में ट्रेनिंग दें।
ट्रेनिंग कार्यक्रमों में पुलिस, मेडिकल, ज्यूडिशियरी, से लेकर आंगनबाड़ी सेविकाएं व विलेज लेवल चाइल्ड प्रोटेक्शन कमेटीज तक शामिल हों।
इस गम्भीर अपराध के विभिन्न पक्षों पर गहन रिसर्च करवाई जाए।
एनसीआरबी क्राइम के इस नए ट्रेंड को समझने के लिए विशेषज्ञों की टीम गठित करे।
एबेंडन मिलने वाले नवजात शिशुओं के शवों के पोस्टमार्टम के लिए विशेष टीम गठित की जाए।
हर जिले में क्राइम डेटा जारी करने के दौरान पुलिस इन मामलों को भी शामिल करें।
पालोना टीम बच्ची की सलामती की दुआ करती है, साथ ही उत्तर प्रदेश पुलिस से ये अनरोध करती है कि इस केस में उपयुक्त सेक्शंस में एफआईआर दर्ज करें और गहन जांच पड़ताल कर दोषियों को सामने लाएं।

