23 June, 2019
Hardoi, UP (F, A)
क्या हुआ -
एक बच्ची को जन्म देते ही ईंटों के ढेर में दबा दिया गया था। लेकिन उसके रोने की आवाज
ने लोगों का ध्यान खींचा। दरवाजे पर पड़ा ताला दुविधा में डाल रहा था। आखिर बंद मकान से
किसी बच्चे के रोने की आवाज कैसे आ रही थी। ताला तोड़कर अंदर जाने पर ईंटों से दबी
बच्ची नजर आई। जिस वक्त उसे वहां से निकाला गया, उसकी कंडीशन बहुत खराब थी। शरीर पर
चोटों के निशान थे। बच्ची खून से सनी थी। जहां बच्ची मिली, वहीं पास में प्लेसेंटा भी
पड़ा था। ऐसा लगता है, मानो वहीं बच्ची का जन्म करवाया गया हो।
घटना हरदोई के गांव महमूदपुर भगत हरिहरपुर जंगबहादुरगंज रोड थाना पिहानी में रविवार
सुबह घटी। जिस मकान में वह मिली, वह संतोष कुमार का है। संतोष कुमार नवंबर माह से अपने
बेटे के पास पानीपत में रह रहे थे। लौटे तो उन्हें घटना की जानकारी मिली।
चाईल्डलाईन और पुलिस की संयुक्त जांच में यह सामने आया कि बच्ची को जन्म पड़ोस में ही
रहने वाली एक नाबालिग लड़की ने दिया था, जो दिल्ली में रहती है। वह शनिवार को ही गांव
में पहुंची थी और रविवार सुबह वापिस चली गई। इसी से अंदेशा जताया जा रहा है कि बच्ची को
जन्म उसी ने दिया है। इस कार्य में गांव के झोलाछाप डॉक्टर लल्ला के शामिल होने की बात
भी कही जा रही है, क्योंकि लड़की को उनके यहां जाते देखा गया था।
सरकारी पक्ष -
बाल कल्याण समिति, हरदोई ने पालोना को बताया कि बच्ची जब मिली थी, तो काफी घायल थी।
इसीलिए उसे पीएचसी के बाद महिला जिला अस्पताल के एसएनसीयू वार्ड में रखा गया था। स्वस्थ
होने के बाद 27 जून को लखनऊ के राजकीय बाल गृह प्राग नारायण रोड भेज दिया गया है।
फिलहाल बच्ची स्वस्थ है और सुरक्षित भी। सीडब्लूसी ने घटना का तुरंत संज्ञान लेते हुए
बच्ची का बेहतर इलाज सुनिश्चित किया, साथ ही इस केस को उपयुक्त धाराओं में दर्ज करने के
लिए पुलिस को आदेश भी दिया।
उधर, थाना प्रभारी पिहानी ने शुरू में ये कहते हुए केस दर्ज करने में टालमटोल की थी कि
बच्ची को इस तरह छोड़ने से पहले मां को सोचना चाहिए था। इसमें पुलिस क्या कर सकती है।
उनकी बातचीत से पालोना को महसूस हुआ कि उन्हें शिशु हत्या और परित्याग के मामलों में
कानून की विशेष जानकारी नहीं है।
पा-लो ना का पक्ष -
बच्ची के साथ बरती गई क्रूरता ने पालोना को स्तब्ध कर दिया है। हम हैरान हैं कि कोई
इतने छोटे बच्चे के साथ इतना क्रूर व्यवहार कैसे कर सकता है। पालोना ने हरदोई जिला बाल
कल्याण समिति से इस मामले को उपयुक्त धाराओं में दर्ज करवाने की अपील की थी।
वहीं पिहानी पुलिस को बताया था कि उन्हें इस केस में आईपीसी की धारा 317, 307, 34 और
जेजे एक्ट की 75 भी लगानी चाहिए। साथ ही यदि प्रसव करवाने वाले डॉक्टर के पास उपयुक्त
अनुभव और सर्टिफिकेट्स नहीं मिलते हैं तो उनके खिलाफ भी आईपीसी के सेक्शन 336 (दूसरे के
जीवन को खतरे में डालना) व 420 के अलावा इंडियन मेडिकल एक्ट की धारा 15 (2,3) के तहत
केस दर्ज करना चाहिए। बाल कल्याण समिति हरदोई के निर्देश और पालोना के दबाव के बाद
अंततः इस मामले में भी केस दर्ज हो गया।
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