08 April 2019 Panipat, Haryana (F,A)
क्या हुआ -
हिसार के सरकारी अस्पताल के शौचालय में रखे डस्टबिन में रविवार सुबह एक नवजात शिशु का
शव मिला है। शिशु एक लड़का है। इस शिशु को पॉलीथिन में पैक करके डस्टबिन में छोड़ दिया
गया था। सफाईकर्मचारी प्रीति सुबह जब शौचालय साफ करने पहुंची और डस्टबिन उठाया तो
उन्हें डस्टबिन थोडा भारी लगा। उसे खोला तो उसमें पॉलीथिन नजर आया।
पॉलीथिन के अंदर एक नवजात लड़का था, जिसे काले रंग के पॉलीथिन को ही कपड़े की तरह
पहनाकर वहां छोड़ दिया गया था। शिशु के शव का शाम को ही दो डॉक्टर्स के बोर्ड ने
पोस्टमार्टम किया और उसमें इस बात की पुष्टि हुई कि शिशु का जन्म उसके मिलने से करीब
पांच घंटे पहले हो चुका था और उसकी हत्या गला घोंट कर की गई है।
पा-लो ना को घटना की जानकारी संवेदनशील नागरिक श्रीमती शोभा आर्य से मिली, जिन्होंने एक
अखबार की खबर पा-लो ना से शेयर की। इसकी डिटेल्स उपलब्ध करवाने में सीनियर जर्नलिस्ट
श्री धर्मेंद्र यादव और श्री मुकेश कुमार ने काफी मदद की।
सरकारी पक्ष -
पा-लो ना ने इस बारे में जांच अधिकारी श्री सिखजीत सिंह से भी बात की। उन्होंने बताया
कि पुलिस ने इस मामले में आईपीसी के सेक्शन 302, 201 और 318 के तहत केस दर्ज कर लिया
है। सीसीटीवी फुटेज खंगाला जा रहा है, ताकि दोषी का पता लगाया जा सके। उन्हें बताया गया
कि इस केस में आईपीसी की धारा 315 का लगना भी बहुत जरूरी है। धारा 315 से ही पता चलता
है कि जिसकी हत्या हुई है, वह एक छोटा सा बच्चा है।
पा-लो ना का पक्ष -
पा-लो ना को इस बात का बेहद अफसोस है कि जागरुकता की कमी की वजह से एक और नवजात शिशु के
प्राण ले लिए गए। यदि उसके परिजनों को सेफ सरेंडर के बारे में मालूम होता, तो शायद वे
किसी भी परिस्थिति में अपराधी बनना पसंद नहीं करते।
पा-लो ना एक और तथ्य की तरफ ध्यान दिलाना चाहता है कि इस मामले में पुलिस ने उपयुक्त
धाराएं भी नहीं लगाई हैं। आईपीसी के सेक्शन 302, 201 और 318 के साथ-साथ इसमें आईपीसी की
धारा 315, 34 और जेजे एक्ट का सेक्शन 75 भी लगाया जाना चाहिए था। उपयुक्त धाराओं में
मामला दर्ज नहीं होने की वजह से ये बच्चे एनसीआरबी के डेटा में नजर नहीं आते, जिस वजह
से ये नजरअंदाज कर दिए जाते हैं। जहां तक आईपीसी के सेक्शन 318 की बात है, तो वह नार्मल
डेथ के बाद त्याग दिए गए बच्चे के मामले में भी लगाई जा सकती है, लेकिन भ्रूण या शिशु
हत्या के मामलों को दर्शाने वाली धारा 315 है।
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