19 April 2019
Hardoi, UP (M)
क्या हुआ -
900 ग्राम के एक नवजात शिशु को हरदोई जिले के कछौना थाना क्षेत्र
के ग्राम बघौना स्थित एक सूखे कुएं में छोड़ दिया गया। बच्चा प्रीमेच्योर है। बघौड़ा
निवासी लालता प्रसाद की पत्नी कमला शुक्रवार सुबह
कुएं के पास से गुजर रहीं थीं कि उन्हें बच्चे के रोने की आवाज सुनाई दी। कुएं में एक
नन्हे से शिशु को देख उन्होंने शोर मचाकर फौरन ग्रामीणों को इकट्ठा कर लिया। पुलिस को
सूचना मिली तो यूपी 100 की टीम भी वक्त पर वहां पहुंच
गई। लोगों में बच्चे को लेने की होड़ लगने लगी। तब थाना प्रभारी ने बाल कल्याण समिति
हरदोई और चाईल्डलाइन को सूचना भेजी। जिसके बाद बच्चे को पीएचसी में फर्स्ट एड दिलवाने
के बाद हरदोई में रेफर कर दिया गया। बच्चा वहां एसएनसीयू
में उपचाराधीन है।
सरकारी पक्ष -
बाल कल्याण समिति, हरदोई के अध्यक्ष श्री शिशिर गौतम ने
पा-लो ना को घटना की डिटेल में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि बच्चे की स्थिति क्रिटिकल
बनी हुई है। उन्होंने पुलिस को इस संबंध में उपयुक्त
धाराओं मे केस दर्ज करने के आदेश भी दे दिए हैं। वहीं थाना प्रभारी श्री रायसिंह ने
पा-लो ने से बातचीत में बताया कि उन्होंने ही बच्चे को अस्पताल पहुंचाकर चाईल्डलाईन और
बाल कल्याण समिति को सूचना दी थी, ताकि बच्चे को बेहतर
मेडिकल केयर मिल सके। इस मामले में केस दर्ज करने की बाबत उनका कहना था कि उन्होंने
जीडी एंट्री कर दी है। उनकी बातचीत से जाहिर हुआ कि उन्हें शिशु परित्याग और हत्या के
मामलों में कानूनी धाराओ की विशेष जानकारी नहीं है। इस
पर पा-लो ना द्वारा उन्हें इस केस में लगने वाले आईपीसी के सेक्शन 317, 307, 34 और जेजे
एक्ट 75 की जानकारी दी गई। उन्हें बताया गया कि यदि बच्चे की मौत हो जाती है (बच्चे की
स्थिति क्रिटिकल बनी हुई है) तो यह और भी संगीन
हो जाएगा, और तब आईपीसी के सेक्शन 315, 304, 34 तथा जेजे एक्ट 75 में तब्दील करना होगा।
जिस पर उनका कहना था कि यूपी में जीडी एंट्री होती है और वो उन्होंने कर दी है। हालांकि
सीडब्लूसी अध्यक्ष श्री शिशिर गौतम ने आश्वस्त
किया है कि वह इस मामले में फॉलोअप करते हुए केस दर्ज करवाना सुनिश्चित करेंगे।
पा-लो ना का पक्ष -
पा-लो ना का मानना है कि यह शिशु समाज द्वारा अमान्य
किसी रिश्ते से जन्मा होगा, जिसकी कीमत उसे इस तकलीफ से गुजर कर चुकानी पड़ी। कोई दोष न
होते हुए भी उसे इस यंत्रणा से गुजरना पड़ा। यह
अमान्य रिश्ता प्रेम संबंध भी हो सकता है और दुष्कर्म का परिणाम भी। इसकी मां कोई
अविवाहित लड़की भी हो सकती है, कोई विधवा या तलाकशुदा महिला भी। या ऐसी महिला भी, जिसका
पति काम करने के लिए दूर गया हो। ये भी हो सकता है कि
बच्चे को मां के अतिरिक्त किसी अन्य व्यक्ति ने वहां कुएं में छोड़ दिया हो। इस काम को
किसी ने भी अंजाम दिया हो, लेकिन इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि उसकी मंशा बच्चे
को नुकसान पहुंचाने की थी।
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