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Latest News On Infanticide

नवजात शिशु मिला था डस्टबिन में, नहीं हुआ केस दर्ज...

02 April 2019
Deoghar, Jharkhand (M)

क्या हुआ - देवघर नगर थाना क्षेत्र के जलसार रोड स्थित टीबी अस्पताल के पास मौजूद सार्वजनिक कूड़ेदान में एक नवजात लड़के का शव मंगलवार, 02 अप्रैल की सुबह मिला। उसे पॉलीथिन और गत्ते के एक डिब्बे में डालकर वहां छोड़ दिया गया था। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, उस इलाके में नर्सिंग होम बहुत हैं और वहीं का मेडिकल वेस्ट उस कूड़ेदार में एक दिन पहले डाला गया था। उन्हें शक है कि बच्चे को भी वहीं से लाकर उसमें छोड़ दिया गया था।
सरकारी पक्ष - एसडीपीओ श्री विकास चंद्र श्रीवास्तव से जब पा-लो ना ने इस संबंध में बात की तो उन्होंने बताया कि वहां हर मामले में केस दर्ज किया जाता है। उन्होंने केस की डिटेल्स लीं और आश्वस्त किया कि इस मामले में भी केस दर्ज किया जाएगा। लेकिन थाना प्रभारी श्री मदन ठाकुर ने पा-लो ना को बताया कि केस दर्ज नहीं किया गया है। उनके मुताबिक, बच्चे का शव काफी सड़-गल गया था, जिसे ड्यूटी पर मौजूद पुलिसकर्मी ने वहां से हटा दिया होगा। श्री ठाकुर ने कहा कि अकसर जो बच्चे मृत पैदा होते हैं, या जन्म के बाद जिनकी मौत हो जाती है, उनके परिजन खुद ही उन्हें इस तरह से फेंक जाते हैं या अस्पताल में ही छोड़ जाते हैं। उन्हें विश्वास है कि इसमें अस्पताल की कोई गलती नहीं होती। उन्होंने विश्वास दिलाया कि आगे से वह इस तरह की घटनाओं पर ध्यान देंगे और हर मामले में केस दर्ज करेंगे। उन्होंने पा-लो ना से संबंधित कानून की जानकारी शेयर करने को भी कहा।
पा-लो ना का पक्ष - पा-लो ना को घटना की जानकारी पत्रकार श्री कुंतलेश पांडे से मिली थी। वहीं, स्थानीय पत्रकार श्री रजनीश ने पुलिस द्वारा केस नहीं दर्ज करने की सूचना दी। हम थाना प्रभारी की इस बात से इत्तेफाक रखते हैं कि स्टिलबोर्न बच्चों के मामले मे अस्पताल की कोई गलती नहीं होती, लेकिन इन बच्चे को चोरी छुपे डिस्पॉज ऑफ करना कानूनन गुनाह है, जिसकी आईपीसी के सेक्शन 318 के तहत एफआईआर दर्ज होनी चाहिए और पोस्टमार्टम में यदि बच्चे की हत्या की पुष्टि होती है तो उसमें आईपीसी के सेक्शन 315 और जेजे एक्ट का सेक्शन 75 भी जोड़ा जाना चाहिए। बच्चे की स्थिति और पोस्टमार्टम रिपोर्ट में वर्णित मृत्यु के कारणों को देखते हुए अन्य उपयुक्त धाराएं भी लगाई जानी चाहिएं। इसके लिए मौका स्थल का मुआयना बहुत सावधानी से करना चाहिए। अधिकांश पुलिस अफसर इस तथ्य से अनभिज्ञ हैं कि देश और झारखंड में शिशु हत्या की घटनाएं बहुत तेजी से बढ़ी हैं और इसलिए वह बच्चे का शव मिलने के बाद उस तरह से मौका मुआयना नहीं करते, जिसकी अपराधियों को पकड़ने के लिए दरकार होती है।
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This cause is dedicated to those infants who shunned by their own parents. These infants are adandoned in deserted public places like railway lines, ponds, bushes, forests, barren lands for some or the other reasons, compulsions, fears or greed.

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