04 दिसंबर 2018
लातेहार, झारखंड (F)
करीब सात माह की इस बच्ची को न जाने कौन पुआल के ढेर में छोड़ गया था। ग्रामीणों की नजर जब बच्ची पर पड़ी, उसके शरीर पर कोई कपड़ा नहीं था। घटना लातेहार के चंदवा थाना क्षेत्र स्थित चकला पंचायत अंतर्गत चतरो-कुसुमटोली गांव की है। बाल कल्याण समिति सदस्य श्री रमेश से घटना की सूचना मिलने पर पा-लो ना ने बाल कल्याण समिति लातेहार के सदस्य श्री रमेश और श्री कमलेश से संपर्क किया और घटना की जानकारी ली। इनसे और अखबार से मिली जानकारी के मुताबिक चतरो-कुसुमटोली गांव में मंगलवार सुबह पुआल के ढेर से आती एक बच्ची के रोने की आवाज से लोगों का ध्यान उस ओर गया। जल्द ही वहां लोगों की भीड़ लग गई। भीड़ में शामिल कुछ लोगों के मुताबिक, इस बच्ची को दो दिन पूर्व चतरो गांव में एक मंदबुद्धि महिला के साथ देखा गया था। उन्हें शक था कि वही महिला बच्ची को यहां छोड़कर चली गई होगी। रमेश जी के मुताबिक, ये भी सुनने में आया है कि पति-पत्नी के बीच झगड़ा होने के बाद बच्ची को उन्होंने छोड़ दिया। बहरहाल, उस दिन बच्ची को पंचायत समिति बसंती देवी व अन्य ग्रामीणों की सलाह से देखरेख के लिए ललिता देवी को सौंप दिया गया। प्रभारी मुखिया कविता देवी व भाजपा नेता हरिवंश प्रजापति ने पुलिस निरीक्षक मोहन पांडेय व बीडीओ श्री अरविंद कुमार को घटना की सूचना दी। अगले दिन बच्ची को लातेहार बाल कल्याण समिति के समक्ष लाया गया। मेडिकल चैकअप से पता चला कि बच्ची की उम्र करीब सात माह और वजन सात किलो है। फिलहाल बच्ची पलामू स्पेशल एडॉप्शन एजेंसी के पास है। जिला उपायुक्त ने बच्ची के संबंध में विज्ञापन प्रकाशित करवा दिया है, ताकि बच्ची के परिजन यदि बच्ची को वापिस ले जाना चाहें, तो ले जा सकें। पा-लो ना इस मामले की तफ्सील से जांच पड़ताल चाहती है। हो सकता है कि बच्ची उस महिला की न रही हो, बल्कि मंदबुद्धि महिला उसे कहीं से उठा लाई हो। सात माह तक बच्ची का पालन-पोषण उक्त महिला द्वारा करने की बात गले से नहीं उतरती। तो एक स्वाभाविक सा प्रश्न मन में उठता है कि बच्ची इतने माह तक किसके पास थी। उसके शरीर पर कपड़ों का न होना भी संशय जगाता है। आस-पास के गांवों में पूछताछ करने पर शायद इस बच्ची के संबंध में कोई जानकारी मिल सके, हालांकि पुलिस इतनी तत्पर होकर जांच-पड़ताल करेगी, इस बात में भी संशय है। यदि पति-पत्नी के बीच झगड़े वाली बात को सही मानें तो झगड़े के बाद बच्चे को छोड़ देने की घटनाएं कई बार सामने आई हैं, लेकिन इस तरह के मामलों में बच्चों को कपड़े उतार कर नहीं छोड़ा जाता। यदि यह बात सच है, तो ये पा-लो ना के लिए भी एक अलग केस स्टडी होगी कि झगड़े के बाद कपड़े उतारकर छोड़ने के पीछे क्या तर्क था। कहीं ऐसा तो नहीं कि वे चाहते हों कि अत्यधिक ठंड बच्ची की जान ले ले। जो भी हो, सच तफ्तीश से ही सामने आ सकता है, लेकिन पुलिस ने अब तक केस ही दर्ज नहीं किया है। बाल कल्याण समिति और प्रशासन इस भरोसे हैं कि उनके द्वारा प्रकाशित किए विज्ञापन के बाद जैविक माता-पिता स्वयं ही उन्हें संपर्क करेंगे। लेकिन सोचने की बात ये है कि जिन्होंने बच्ची को छोड़ दिया हो, और जिन्होंने अब तक उसकी सुध भी नहीं ली हो, क्या वे आगे बढ़कर खुद जिला प्रशासन से संपर्क करेंगे।
