19 जून 2018 चाईबासा, झारखंड (F)
उस बच्ची को ट्रेन की एक सीट पर छोड़ दिया गया। छोड़ने वाली मां थी। सहयात्री ही नहीं, वरन पैंट्री कार मैनेजर भी इसके गवाह थे। बच्ची करीब पांच माह की है। घटना मंगलवार को हरिद्वार-पुरी उत्कल एक्सप्रेस 18477 में जमशेदपुर और चक्रधरपुर के बीच घटी। पत्रकार श्री उपेंद्र कुमार की सूचना पर पा-लो ना ने सीनियर डीएससी श्री इब्राहिम शरीफ से संपर्क किया तो पूरा वाकया पता चला। इसके अनुसार, एक महिला अपनी पांच माह की बच्ची को उत्कल एक्सप्रेस की एस 06 बोगी की 07 नंबर सीट पर छोड़कर जमशेदपुर में उतर गई। लेकिन वहां उतरने से पहले उस महिला ने पैंट्री कार मैनेजर के फोन से अपने किन्हीं रिश्तेदार से बात की थी। इसके बाद उसने मैनेजर को एक नंबर दिया, ये कहते हुए कि बच्ची के अंकल आकर उसे अपने साथ ले जाएंगे। जमशेदपुर और चक्रधरपुर के बीच सहयात्रियों को बच्ची के वहां अकेले होने का पता चला। तब किसी यात्री ने रास्ते से ही कंट्रोल रूम को फोन कर दिया और जैसे ही गाड़ी सात-साढ़े सात बजे चक्रधरपुर पहुंची, कंट्रोल रूम की सूचना पर वहां पहुंची आरपीएफ ने बच्ची को बरामद कर लिया। बच्ची एकदम स्वस्थ और सुरक्षित है। उसे केयर के लिए पहले सीधे रेलवे हॉस्पिटल की केयर यूनिट ले जाया गया और फिर वहां से चाईल्ड लाईन और भारतीय रेड क्रॉस सोसायटी के सहयोग से सुरक्षित लाकर बाल कल्याण समिति चाईबासा के संरक्षण में दे दिया गया। चाईबासा में शिशु गृह नहीं होने की वजह से उसे फिलहाल अस्पताल में ही रखा गया है। इस मामले में महिला की मानसिक अस्वस्थता की बात सामने आ रही है। इसका पता तब चला, जब पैंट्री कार मैनेजर को दिए गए नंबर पर महिला के रिश्तेदार से बात की गई। यह हरियाणा के फरीदाबाद का नंबर था। रिश्तेदार ने बताया कि महिला मानसिक रूप से अस्वस्थ है। टीम पा-लो ना का मानना है कि महिला की मानसिक बीमारी को कानून से बचने के लिए भी प्रयोग किया जा सकता है। एक आशंका ये भी है कि महिला और उनके पति या रिश्तेदारों के बीच में किसी बात को लेकर झगड़ा हुआ हो, जिसमें गुस्से में आकर महिला अपनी बच्ची को ट्रेन में ही छोड़कर और उक्त रिश्तेदार को बताकर उतर गई। मानसिक रूप से अस्वस्थ मां के साथ एक छोटी सी बच्ची को छोड़ने का साहस कोई भी नहीं करेगा। अगर ऐसा किया गया है तो महिला से ज्यादा दोषी उसका वह परिवार है, जिसने ऐसा होने दिया। इसलिए जरूरी है कि इस मामले की अच्छी तरह से जांच पड़ताल हो, ताकि बच्ची की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
