17 मई 2018 बरेली, उत्तर प्रदेश (F)
उस प्यारी सी बच्ची को सड़क किनारे खड़ी बैलगाड़ी में छोड़ दिया गया। न उसके शरीर पर कोई कपड़ा और न कोई चादर। बस नंगे बदन यूं ही छोड़ दिया उस खाली बैलगाड़ी में। घटना बरेली के भुतो स्थित गांव पड़ौली में गुरुवार अहले सुबह घटी। पा-लो ना घटना के संबंध में बरेली सीडब्लूसी के चेयरपर्सन श्री डी.एन. शर्मा से बात की तो उन्होंने बताया कि भुतो के पड़ौली गांव में बच्ची को कोई सुबह सुबह बैलगाड़ी में रख गया था। खेत पर जाने वाले ग्रामीणों ने बच्ची के रोने की आवाज सुनी और उसे वहां से उठा लिया। पुलिस को सूचना भेजी गई। जल्द ही भुतो पुलिस पड़ौली पहुंच गई और बच्ची को अपने साथ थाने ले गई। दोपहर में चाईल्डलाईन वाले बच्ची को वहां से ले गए और जिला अस्पताल में बच्ची का मेडिकल परीक्षण करवाया। बच्ची पूरी तरह स्वस्थ है। शाम को बच्ची को बाल कल्याण समिति के सामने पेश किया गया, जहां से उसे रामपुर स्थित शिशु केंद्र भेज दिया गया है। हालांकि परिवार ने बच्ची का परित्याग किया है, फिर भी टीम पा-लो ना उनकी शुक्रगुजार है, क्योंकि उन्होंने बच्ची को बैलगाड़ी में रखा, उसे नीचे नहीं फेंका। वरना बच्ची को बचाने की संभावना उतनी ही कम हो जाती। इसके अलावा यदि किसी जानवर की नजर उस पर पड़ जाती, या उसकी गंध उन्हें मिल जाती, तब भी बच्ची को बचाना मुश्किल होता। लोगों को ये समझना होगा कि वे अपने बच्चो को कहीं भी नहीं रख सकते, इससे वे कानूनी कार्यवाही में फंस सकते हैं। उनके पास बच्चों को सौंपने का विकल्प मौजूद है। वह अपने ऐरिया की बाल कल्याण समिति को संपर्क करें या चाईल्ड लाईन को 1098 पर कॉल करें या फिर पा-लो ना को 9798454321 पर कॉल करके यह जान सकते हैं कि बच्चे को किन्हें सुरक्षित सौंपा जा सकता है। इसके लिए उन्हें घबराने की भी आवश्यकता नहीं है। क्योंकि ऐसा करते हुए उनकी पहचान गुप्त रखी जाती है। इसलिए पा-लो ना बार-बार ये अपील करती है कि बच्चों को त्यागने की बजाय सौंपने का विकल्प चुनें।
